Sagar Manthan

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सागर को मध्य प्रदेश का ह्रदय स्थल कहा जाता है । सागर शहर का नाम “सौगढ़” से बना है । सौगढ़ का अर्थ है सौ(100) किले । सागर शहर में सभी धर्मों के लोग मिल-जुल कर रहते है,और सभी धर्मों के त्योहार बहुत ही धूमधाम से मनाए जाते है । सागर शहर में एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय, एक सरकारी मेडीकल कॉलेज,एक सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज, और कई निजी इंजीनियरिंग कॉलेजेस है । यहाँ सभी धार्मिक उत्सव बहुत धूम धाम से मनाए जाते है । सावन में जब मंदिर में झूले में भगवान विराजमान होते है तो सागर का नज़ारा वृन्दावन की तरह होता है । दुर्गा नवमी में कलकत्ता की तरह, और गणेश उत्सव में महाराष्ट्रा की तरह । सागर शहर में लाखा बंजारा झील शहर की खूबसूरती को और बढाती है । झील के चारों ओर बसा हुआ शहर लोगो के आकर्षण का केंद्र है । सागर में कई सपूतों ने जन्म लिया जिनहोने सागर का नाम रोशन किया है। जैसे डॉ हरीसिंह गौर ने विश्वविद्यालय का निर्माण करवाया । गोविंद नामदेव , आशुतोष राणा, मुकेश तिवारी आदि ने विश्वविद्यालय के रंगमंच से शुरुवात करके फिल्मी दुनिया में प्रसिद्धि पाई । माननीय विट्ठल भाई पटेल ने राजनीति और फिल्मी क्षेत्र में योगदान दिया। इन्होने “झूठ बोले कौवा काटे” जैसे प्रसिद्ध गाने दिये । सागर में बड़ा बाज़ार नामक स्थान चौपाटी के नाम से प्रसिद्ध है ।